राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि उच्च गुणवत्तापूर्ण व व्यवहारिक शिक्षा की ज्योति से ही वास्तविक रूप से राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। इसके लिये विद्यार्थियों को सैद्धान्तिक शिक्षा के साथ व्यवहारिक शिक्षा भी आज की समयानुरूप आवश्यकता है।
राज्यपाल श्री मिश्र गुरुवार को राजसमन्द के गांव बिलोता में मोहनलाल सुखाडिया विश्वविद्यालय उदयपुर के श्रीनाथ पीठ उत्कृष्टता केन्द्र की आधारशिला भूमि पूजन के कार्यक्रम में सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा मानवीयता के गुणों से पूर्ण होने के साथ ही व्यवहारिक हो। उसमें हमारी कला, संस्कृति, दर्शन का भी समावेश होना चाहिए जिससे कि मानव मात्र का कल्याण संभव हो सके।
राज्यपाल ने इस अवसर पर शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार के महत्व को बताते हुये कहा कि इससे हम कौशल विकास, क्षमता व दक्षता संवर्धन व व्यहावहारिक ज्ञान से युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कदम बढा सकते हैं। उन्होंने इसके लिये सभी विश्वविद्यालयों को इस दिशा में काम करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शिक्षा पद्धति ऐसी हो जिससे कि विद्यार्थिेयों का बौद्धिक और मानसिक सहित समग्र विकास होकर वे देश के जिम्मेदार नागरिक बन सकें। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति सहनशीलता की प्रतिमूर्ति, कार्यकौशल में दक्ष व अनेक गुणों से परिपूर्ण होती है। उन्होंने स्त्री शिक्षा पर बल देते हुए कहा कि इसके लिये विशेष प्रबन्ध किये जाने की आवश्यकता है।
राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि मेवाड़ और नाथद्वारा की पहचान धर्म क्षेत्र के साथ ज्ञान और कला के लिए भी बने। इसके साथ ही उन्होंने मेवाड़ को त्याग, तपस्या, बलिदान और शौर्य, की भूमि बताते हुये यहां के धर्म, दर्शन, कला, संस्कृत और परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। राज्यपाल श्री मिश्र ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना और मूल कर्तव्यों का पठन भी किया।
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