राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने भारतीय यज्ञ संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए संकल्पबद्ध होकर प्रयास करने का आह्वान किया है । उन्होंने प्राचीन भारतीय यज्ञ परंपरा और कर्मकांड को आधुनिक परिप्रेक्ष्य में वैज्ञानिक सोच के साथ लागू करने और इनके अंतर्निहित आलोक से भी जन-जन को लाभान्वित करने का आह्वान किया है ।
राज्यपाल श्री मिश्र गुरुवार को डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा उपखंड मुख्यालय पर स्थित गायत्री शक्तिपीठ में आयोजित 108 कुंडीय यज्ञ अनुष्ठान में भाग लेने के बाद संबोधित कर रहे थे । उन्होंने कहा कि यज्ञ अनुष्ठान मानव मात्र के कल्याण और विश्व शांति का सूचक है और यज्ञ के जरिए सर्व कल्याण को व्यवहार में सिद्ध किया जाता है।
राज्यपाल ने भगवान महावीर स्वामी तथा डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर नमन करते हुए कहा कि तीर्थंकर भगवान महावीर ने अहिंसा का संदेश देकर तथा बाबा साहब ने संविधान का निर्माण कर समाज को सर्वजन हिताय की दिशा दी ।
राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का आधार है जिसमें प्रकृति, पर्यावरण, नभ, जल तथा प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण की भावना समाविष्ट होती है । उन्होंने कहा कि भारत के संस्कार विश्व कुटुंब की भावना को जन-जन को अपने आचरण में उतारना चाहिए ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने प्रदेश, राष्ट्र तथा सकल विश्व में सुख, समृद्धि, अमन- चैन के लिए वैदिक मंत्रोच्चार के साथ आहुतियां दी । उन्होंने वेद शक्ति मां गायत्री की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया । गायत्री परिवार की ओर से राज्यपाल को तिलक कर उपरणा एवं शाल ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया ।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद श्री कुंवर हर्षवर्धन सिंह, लोकसभा सांसद श्री कनकमल कटारा भी उपस्थित रहे।
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