राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने शनिवार को उदयपुर में भारतीय सेना द्वारा प्रताप स्मारक स्थल पर उपहार में प्रदत्त युद्धक टैंक टी 55 का भव्य अनावरण किया। इससे पहले राज्यपाल ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए।
राज्यपाल श्री मिश्र ने अपने उद्बोधन में महाराणा प्रताप के बलिदान को याद किया और कहा कि वह प्रताप को पहला स्वतंत्रता सेनानी मानते हैं। महाराणा प्रताप ने कभी समझौता नहीं किया, विपरीत परिस्थितियों में घास की रोटी खाकर, स्वाभिमान की रक्षा करते हुए जीवन यापन किया। इतना ही नहीं, प्रताप ने अकबर की बड़ी सेना का अपने पराक्रम से मुकाबला किया।
राज्यपाल ने कहा कि महाराणा प्रताप द्वारा मातृभूमि की आजादी के लिए किया गया संघर्ष मामूली नहीं था, वह अपनी छोटी सी परन्तु बहादुर सेना के साथ युद्ध लड़ते रहे, छापामार युद्ध पद्धति, शत्रुओं को हतोत्साहित करने की शक्ति आदि ने उन्हें हमेशा अग्रणी रखा। उन्होंने कहा कि मातृभूमि के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने की प्रेरणा महाराणा प्रताप से ही मिलती है। उन्होंने अपने भाषण में प्रताप स्मारक की स्थापना के महत्व एवं यहां टी 55 टैंक को लाने पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने कार्यक्रम में भगत सिंह, सुखदेव एवं राजगुरु के परिजनों का सम्मान भी किया।
श्री लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने मंच से कहा कि महाराणा प्रताप स्मारक समिति शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए अपने आपको गौरवान्वित महसूस करती है। उन्होंने कहा कि मेवाड़ की भूमि हमेशा संघर्षशील रही और कभी आक्रान्ताओं के सामने समझौता नहीं किया। सेवानिवृत लेफ़्टिनेंट जनरल जे एस नैन ने युद्धक टैंक टी-55 की महत्ता और युद्धों में इसके योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उदयपुर के एक दिवसीय दौरे के अंतर्गत शनिवार प्रातः यहां डबोक एयरपोर्ट पहुंचने पर सम्भागीय आयुक्त श्री राजेन्द्र भट्ट, जिला कलक्टर श्री तारा चंद मीणा और जिला पुलिस अधीक्षक श्री विकास शर्मा ने बुके भेंट कर स्वागत किया। यहाँ से राज्यपाल सर्किट हाउस होते हुए मोती मगरी स्थित प्रताप स्मारक पहुंचे जहां सर्वप्रथम उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
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