राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने मंगलवार को बांसवाड़ा में गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय के नवनिर्मित प्रवेश द्वार, संविधान उद्यान और संविधान स्तम्भ का लोकार्पण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अकादमिक भवन के शिलान्यास के साथ गोविन्द गुरु की प्रतिमा का भी अनावरण किया।
राज्यपाल श्री मिश्र ने इस अवसर पर कहा कि गोविन्द गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय जनजातीय परंपराओं और संस्कृति से जुड़े उनके प्रकृति सरोकारों पर मौलिक शोध के लिए कार्य करे। उन्होंने कहा कि गोविंद गुरु व्यक्ति नहीं संस्था थे। वह युग प्रवर्तक ऐसे महापुरुष थे जिन्होंने अपने समय में सामाजिक जागरूकता की क्रांति का शंखनाद किया। उन्होंने गोविन्द गुरु द्वारा ‘भगत पंथ’ की स्थापना के साथ धार्मिक जागृति और स्वाधीनता संग्राम मे उनके योगदान को भी बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए उनके आदर्शों से सीख लेने का आह्वान किया।
राज्यपाल ने कहा कि जो समाज जितना अधिक शिक्षित होता है उसका विकास भी उतनी ही तेजी से होता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा के केन्द्र मात्र ही नहीं है बल्कि यह वह स्थान है जहां विद्यार्थी ज्ञान का व्यावहारिक आलोक पाते हैं। उन्होंने नई शिक्षा नीति की चर्चा करते हुए कहा कि यह विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर केन्द्रित है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के आलोक में पाठ्यक्रमों को अद्यतन करते हुए रोजगारपरक शिक्षा के लिए प्रयास करने पर जोर दिया।
राज्यपाल ने संविधान उद्यान के निर्माण पर बधाई देते हुए कहा कि इससे देश की युवा पीढ़ी संविधान संस्कृति से जुड़ेगी। उन्होंने कहा कि संविधान उद्यान नई पीढ़ी को संविधान प्रदत्त अधिकारों के साथ कर्तव्यों की याद दिलाता रहेगा। उन्होनें विश्वविद्यालय द्वारा आदिवासी कला और संस्कृति के संरक्षण के साथ जनजातीय परम्पराओं और भाषाओं पर शोध के लिए भी कार्य करने का आह्वान किया।
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