Thursday , 21 May 2026

दूसरों के लिए कुछ करने का भाव ही मनुष्यता का वास्तविक मर्म

राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि भारतीय संस्कृति में सेवा को सबसे बड़ा धर्म कहा गया है। दूसरों के लिए कुछ करने का भाव ही मनुष्यता का वास्तविक मर्म है। इसलिए हमें सदैव यथासंभव दूसरों के लिए कार्य करने की भावना से प्रेरित रहना चाहिए।

राज्यपाल श्री मिश्र मंगलवार को सीकर जिले के खाटू श्याम जी में ओडिशा के राज्यपाल प्रो. श्री गणेशीलाल के साथ श्रीश्याम शरणम् धर्मशाला का शिलान्यास करने के बाद सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वही समाज विकास करता है, जहां दूसरों के लिए उदात्त दृष्टि होती है। हमारी प्राचीन संस्कृति इन्हीं उदात्त जीवन मूल्यों से जुड़ी है और इसी से हमें जीवन का अर्थ, जीवन जीने का तरीका सीखने को मिलता है।

राज्यपाल ने कहा कि धर्म और मानवता के कल्याण के लिए किए जाने वाले कार्यों का दीर्घकालीन सकारात्मक परिणाम पूरे समाज को मिलता है। उन्होंने खाटू श्रीश्याम बाबा को नमन करते हुए कहा कि खाटू श्याम जी की पवित्र धरा तो अध्यात्म के संस्कारों से ओत-प्रोत है। उन्होंने कहा कि खाटूधाम के वायुमंडल में हमेशा भक्ति का प्रवाह बहता रहता है।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने संविधान की उद्देशिका और मूल कर्तव्यों का भी पठन किया। साथ ही मोरवी नंदन खाटूश्याम चालीसा पुस्तक का विमोचन किया।

कार्यक्रम में श्याम शरणम् धर्मशाला के पदाधिकारी डॉ.मनोज विप्लव, श्री भूपेन्द्र गुप्ता, श्याम मंदिर कमेटी के पदाधिकारीगण सहित प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

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