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पारम्परिक खेती के ज्ञान के साथ अपनाने होंगे नवाचार

राज्यपाल ने एमपीयूएटी के 16वें दीक्षांत समारोह में शिरकत की

पारम्परिक खेती के ज्ञान के साथ अपनाने होंगे नवाचार – राज्यपाल

जयपुर/उदयपुर, 21 दिसंबर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि खेती के पारम्परिक तरीकों के साथ कृषि विज्ञान की हमारी वैदिक परम्परा पर वृहद स्तर पर चिंतन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिक ऐसे उपाय सुझाएं जिससे खेत-खलिहानों में समृद्धि की बयार आए। उन्होंने प्राचीन कृषि संस्कृति को सहेजने की जरूरत भी बताई।

कुलाधिपति बुधवार को उदयपुर के महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 16 वें दीक्षांत समारोह में विवेकानंद सभागार में संबोधित कर रहे थे। कुलाधिपति ने योग्य छात्र छात्राओं को उपाधि एवं स्वर्ण पदक प्रदान किये। श्री मिश्र ने वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को नमन भी किया।

राज्यपाल ने कहा कि कृषि एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय शोध और शिक्षा में देश का प्रमुख केन्द्र बने, इसके लिए जरूरी है कि नवाचार अपनाते हुए ऐसे विषयों पर विश्वविद्यालय ध्यान दें जिससे खेतों में उन्नत पैदावार हो तथा स्थानीय जलवायु के अनुसार खेती आगे बढ़े।

राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि कृषि क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पैदावार में वृद्धि हुई है परन्तु मिट्टी की उर्वरा शक्ति क्षीण हुई है, खेती का क्षेत्र घटने लगा है। इसके साथ ही और भी बहुत सारी समस्याएं कृषि क्षेत्र में उत्पन्न हुई है।

राज्यपाल ने कहा कि वे चाहते हैं कि महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय इन समस्याओं के प्रभावी समाधान हेतु नई तकनीकों के उपयोग के साथ ही ऐसे शोध विकसित करें जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़े, विभिन्न प्रकार की फसलों का उत्पादन हो साथ ही खेती में रासायनिक उर्वरकों का कम से कम उपयोग हो।

कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी हेतु बहु-आयामी रणनीति अपनानी होगी

उन्होंने कहा कि कृषि उत्पादन में बढ़ोतरी व खाद्य सुरक्षा के अंतर्गत हमें अब बहु-आयामी रणनीति अपनानी होगी। जिसके अंतर्गत खाद्य उत्पादन के साथ ही उनके भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण, जरूरतमंदों के लिए विषिष्ट उत्पादन कर उन तक प्रभावी रूप में पोषण पहुंचाने की दिशा में भी कार्य करने होंगे। जलवायु परिवर्तन तथा ग्लोबल वार्मिंग इस समय की सबसे बड़ी समस्याएं हैं।

उन्होने कहा कि कृषि एवं प्रौद्योगिकी के जरिए बहुत बड़े स्तर पर समाज में परिवर्तन किया जा सकता है और महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय यह कार्य बखूबी कर रहा है।
इस विश्वविद्यालय ने भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् की रैंकिंग में प्रदेश में प्रथम और समूचे देश मे 15वाँ स्थान प्राप्त किया है और इसके लिए उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति एवं पूरे परिवार को बधाई दी।
उन्होंने कहा कि समय संदर्भों के साथ कृषि तकनीकी क्षेत्र में विशेषज्ञ पाठ्यक्रमों एवं समन्वित शोध की शुरूआत हो, जिनसे युवा वर्ग कृषि क्षेत्र की वैश्विक और पर्यावरण संरक्षण की चुनौतियों का सामना कर सके।

राज्यपाल ने स्टार्ट अप को बढ़ावा देने के लिए किया प्रेरित

राज्यपाल ने विद्यार्थियों के स्टार्ट अप, कैंपस प्लेसमेंट अखिल भारतीय शोध परियोजनाओं, मक्का, मशरूम और फूलों की नयी किस्मों के विकास, डिजिटल टेक्नोलॉजी के विकास, कृषि ड्रोन और हुमनोइड रोबोट की स्थापना, बीजोत्पादन, मत्स्य पालन, प्रताप धन मुर्गी उत्पादन, कृषि विज्ञान केन्द्रों द्वारा प्रदेश के सात जिलों में और आदर्श ग्राम में किये जा रहे कृषि प्रसार कार्यों, विश्वविद्यालय के राजस्व में बढ़ोत्तरी, कृषक महिलाओं, ग्रामीण युवाओं व फैकल्टी के कौशल विकास की बात कही।
कुलपति डॉ अजीत कुमार कर्नाटक ने विश्वविद्यालय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। पूर्व कुलपति एमपीयूएटी तथा पूर्व उप महानिदेशक (कृषि शिक्षा) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली डॉ एस. एल. मेहता ने दीक्षांत उद्बोधन दिया।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने सर्वप्रथम संविधान की उद्देशिका एवं मूल कर्तव्यों का वाचन किया।
आरंभ में जिला कलक्टर ताराचंद मीणा व जिला पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा ने माननीय राज्यपाल श्री मिश्र की अगवानी की।

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