Thursday , 21 May 2026

आयुर्वेद विश्वविद्यालय विश्व का उत्कृष्ट आयुर्वेद शोध केन्द्र बने

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक संदर्भों में विकसित करने की आवश्यकता जताई है। उन्होंने आयुर्वेद विश्वविद्यालय को आयुर्वेद चिकित्सा शोध एवं अनुसंधान में विश्व का उत्कृष्ट केन्द्र बनाए जाने का भी आह्वान किया।

श्री मिश्र सोमवार को राजभवन में डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन् राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर के पंचम दीक्षांत समारोह में ऑनलाईन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों से प्रेरणा लेते हुए विश्वविद्यालय में चिकित्सा के नवीन शोध कार्यों को बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। उन्होनें कहा कि इसी से हमारी आयुर्वेद की महान चिकित्सा पद्धति को फिर से जीवंत किया जा सकता है।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने विद्यार्थियां को गरीब और जरूरतमंद रोगियों की विशेष रूप से सेवा करने का संकल्प लेने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राचीन गं्रथों और आधुनिक संदर्भों को जोड़ते हुए यदि नवीनतम शोध और अनुसंधान होते हैं तो इसके बहुत अच्छे परिणाम संपूर्ण मानवता के लिए सामने आएंगे।

राज्यपाल ने आजादी के अमृत महोत्सव पर स्वाधीनता आन्दोलन के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए युवाओं को अपने सामर्थ्य और कौशल का विकास कर भारत के नव निर्माण का संकल्प लेने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के भावी आयुर्वेद चिकित्सकों को चाहिए कि वे अपने मरीजों के साथ सहानुभूति रखते हुए आयुष पद्धतियों के कारगर उपयोग से निरोगी राजस्थान के लिए कार्य करें।

श्री मिश्र ने कहा कि कोविड के इस दौर में आयुर्वेद के महत्व को विश्वभर में स्वीकार किया गया है। अब यह प्रमाणित हो गया है कि आयुर्वेद से असाध्य से असाध्य रोग का भी ईलाज हो सकता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को चाहिए कि वह आयुष पद्धतियों को व्यावहारिक बनाए। उन्होंने कोविड महामारी के दौरान विश्वविद्यालय द्वारा गिलोय पर किये गये शोध-कार्य को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा मान्यता प्रदान किए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे भारतवर्ष के लिये गौरव की बात है। उन्होंने विश्वविद्यालय के पंचकर्म विभाग में ‘‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’’ की स्थापना की भी सराहना की।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने इससे पहले विश्वविद्यालय में संविधान उद्यान और संविधान स्तम्भ का लोकार्पण किया। उन्होंने आरम्भ में सभी को संविधान की उद्धेशिका और मूल कर्तव्यों का भी वाचन करवाया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अतर्गत आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी एवं योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के अंतर्गत स्नातक, स्नातकोतर एवं पीएचडी उपाधियां प्रदान की तथा विभिन्न संकायो के विद्यार्थियों को कुलाधिपति स्वर्ण पदक भी ऑनलाईन प्रदान किए। श्री मिश्र ने दीक्षान्त समारोह में यूनिवर्सिटी रिसर्च प्रोजेक्ट से संबंधित पुस्तक ‘एविडेंस बेस्ड आयुर्वेदा ट्रिटमेंट प्रोटोकॉल’ का भी लोकार्पण किया।

आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अभिमन्यु कुमार ने इस मौके पर बताया कि कि राज्य सरकार द्वारा 50 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान कर कर विश्वविद्यालय में विशेष कोटेज-संकुल का निर्माण कार्य प्रारम्भ किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे आयुर्वेद पर्यटन के क्षेत्र में राजस्थान का विश्वभर में नाम होगा। उन्होंने आयुर्वेद विश्वविद्यालय द्वारा आई.आई.टी तथा अन्य प्रमुख संस्थानों के साथ शोध और अनुसंधान से संबंधित एम.ओ.यू. किए जाने तथा अन्य शोध गतिविधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

दीक्षान्त समारोह में राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री सुबीर कुमार और प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्दराम जायसवाल, शिक्षाविद्, विद्यार्थियों, प्रबंध मंडल के सदस्यों और अन्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने ऑनलाईन भाग लिया।

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