राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अन्त्योदय के विचार पर आधारित योजनाओं के निर्माण से देश में आर्थिक सुदृढ़ीकरण की नई राहें खुलेंगी। उन्होंने कहा है कि राष्ट्र के विकास और गरीबों के उत्थान के लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय के वैचारिक दर्शन पर चलने की आज सर्वाधिक आवश्यकता है।
राज्यपाल श्री मिश्र बुधवार को लखनऊ में पंडित दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान द्वारा ‘सतह से शिखर तक अन्त्योदय का शंखनाद’ विषयक संगोष्ठी में सम्बोधित कर रहे थे। राज्यपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय अद्भुत व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने भारतीय जीवन पद्धति में समाहित ‘एकात्म मानववाद’ के दर्शन को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत किया और ‘अन्त्योदय’ के जरिए अंतिम जन के उत्थान के माध्यम से राष्ट्र के सुदृढ़ीकरण का मंत्र दिया। उन्होंने कहा कि पं. दीन दयाल उपाध्याय का मानना था कि जब तक समाज के आखिरी पायदान पर, अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का विकास नहीं होगा तब तक सुदृढ़ और संपन्न राष्ट्र के निर्माण की कल्पना को पूरा नहीं किया जा सकता है। उनके ये विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक है।
राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि राष्ट्र की निर्धनता और अशिक्षा को दूर करके ही आर्थिक विकास के साथ देश में आय के समान वितरण को सुनिश्चित किया जा सकता है, यह पं. दीनदयाल उपाध्याय का ही विचार था। उन्होंने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय का बचपन बहुत अभावों में बीता था, इसलिए ‘अंत्योदय’ सही मायने में उनके अन्तःकरण की आवाज थी। वह हरेक उस व्यक्ति के विकास के लिए विचार करते थे, जो अभावों में पलकर आगे बढ़ सके।
राज्यपाल ने कहा कि ‘हर घर नल से जल’. गांव-गांव बिजली, उज्ज्वला, निशुल्क अनाज वितरण आदि की जो योजनाएं चलाई जा रही हैं, वह ‘अन्त्योदय’ को ही क्रियान्वित करने वाली हैं। उन्होंने कहा कि पं. दीनदयाल शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने के बहुत हिमायती थे और उनका मानना था कि शिक्षा जितनी गहरी और व्यापक होगी, समाज उतना ही संपन्न होगा।
संगोष्ठी में उत्तरप्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ. हृदय नारायण दीक्षित, उत्तरप्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, दीनदयाल सेवा प्रतिष्ठान के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र सहित गणमान्यजन उपस्थित रहे।
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