राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कलराज मिश्र ने कहा है कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना विकसित करने में योगदान दें। उन्होंने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में शिक्षाविदों, शिक्षण संस्थाओं एवं विद्यार्थियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, इससे प्रेरणा लेने की आवश्यकता है।
राज्यपाल श्री मिश्र कोटा विश्वविद्यालय, कोटा के 8वें दीक्षान्त समारोह में मंगलवार को यहां राजभवन से ऑनलाइन सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने आजादी के अमृत महोत्सव को भारतीय लोकतंत्र का महत्वपूर्ण पड़ाव बताते हुए कहा कि हमें उन लोगों की स्मृति को अमिट बनाना होगा जिन्होंने देश को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की गौरवगाथा लिखी है। उन्होंने कहा कि हमें इस अवसर पर देश की अब तक की उपलब्धियों एवं आवश्यकताओं, वर्तमान स्थितियों तथा भविष्य की सम्भावनाओं और चुनौतियों पर भी मंथन करना होगा।
कुलाधिपति ने आह्वान किया कि विश्वविद्यालय पाठ्यपुस्तकों के ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों को जीवन व्यवहार की शिक्षा प्रदान करें। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों से विद्यार्थियों को जोड़कर उनके सर्वांगीण विकास को प्रोत्साहन दिया जाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को भारतीय सभ्यता, कलाओं, संगीत, नृत्य, वास्तु आदि विषयों की दृष्टि विकसित करने वाली पुस्तकों से जोड़ने के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर प्रयास होने चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में जन भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया जाए ताकि स्थानीय स्तर पर देश का गौरव बढ़ाने वाले छोटे-छोटे बदलाव राष्ट्रीय उपलब्धि का रूप ग्रहण कर सकें। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने को केवल पाठ्यक्रम तक ही सीमित नहीं रखें बल्कि ज्ञान के नए स्त्रोतों से भी स्वयं को जोड़ें।
राज्यपाल श्री मिश्र ने कहा कि कोरोना काल में ऑनलाइन शिक्षा कक्षा-कक्ष शिक्षण के सहयोगी के रूप में काफी उपयोगी सिद्ध हुई है। उन्होंने कहा कि नए केन्द्रीय आम बजट में ई-विद्या और डिजिटल शिक्षण के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्होंने ऑनलाइन शिक्षा को विद्यार्थियों के लिए अधिकाधिक लाभकारी बनाने पर जोर दिया।
कुलाधिपति श्री मिश्र ने दीक्षान्त समारोह में स्नातक, स्नातकोत्तर उपाधियां एवं पीएचडी की 63 उपाधियां तथा सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले कला संकाय के 9, समाज विज्ञान संकाय के 10, विज्ञान संकाय के 19, वाणिज्य संकाय के 9, विधि संकाय के 2 एवं शिक्षा संकाय के 4 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक प्रदान किये। शिक्षा संकाय के श्री आशीष सक्सेना को कुलाधिपति पदक एवं विधि संकाय के श्री राजेश रामवानी को कुलपति पदक प्रदान किए गए।
दीक्षांत अतिथि एवं श्री गोविन्द गुरु विश्वविद्यालय, गोधरा के कुलपति प्रो. प्रतापसिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2003 में स्थापना के बाद से कोटा विश्वविद्यालय ने अकादमिक श्रेष्ठता के उच्च मानदण्ड स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण, व्यक्ति निर्माण और इसके फलस्वरूप राष्ट्र निर्माण में शिक्षा का महती योगदान है।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा सिंह ने प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत कर विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, सह-शैक्षणिक एवं अन्य गतिविधियों, विकास कार्यों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
राज्यपाल श्री मिश्र ने समारोह के आरम्भ में उपस्थित अतिथियों, शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं को भारतीय संविधान की उद्देश्यिका एवं संविधान के अनुच्छेद 51 (क) में वर्णित मूल कर्तव्यों का वाचन भी करवाया।
इस अवसर पर राज्यपाल के प्रमुख सचिव श्री सुबीर कुमार, प्रमुख विशेषाधिकारी श्री गोविन्द राम जायसवाल, विश्वविद्यालय प्रबंध-मण्डल एवं विद्या-परिषद के सदस्यगण, शिक्षकगण एवं विद्यार्थीगण प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन उपस्थित रहे।
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